वो चला था -
तनहा सफ्फ़र में
कभी कि- बेगानी
दुनिया में
मिले थे
हमनवा कई .
कारवां जुड़ता रहा
मसला चलता रहा
हर ठोकर पर
आस बांधे आए
कदम भी कई
इस टूटे दिल को
मिलने में
वक़्त के कई
दोराहे गुजरे
जुड़े तो थे
कई पैबंद
मगर फांकों में
सभी तार तार
बिखरे .
तनहा सफ्फ़र में
कभी कि- बेगानी
दुनिया में
मिले थे
हमनवा कई .
कारवां जुड़ता रहा
मसला चलता रहा
हर ठोकर पर
आस बांधे आए
कदम भी कई
इस टूटे दिल को
मिलने में
वक़्त के कई
दोराहे गुजरे
जुड़े तो थे
कई पैबंद
मगर फांकों में
सभी तार तार
बिखरे .