अहसास ज़िंदगी
ये ज़िंदगी की कश्मकश भी
अजीब है
मरने से पहले
जीना भी ज़रूरी है।
डोरों में उलझती
ज़िंदगी
और हर डोर
एक नई
गाँठ का
जोड़ लगा जाती है।
तसव्वुर में
बंधी जो तस्वीर
एक न एक दिन
टूट बिखर जाती है।
कि टुकड़े भी समेटे
न गए हमसे
बस अहसासों
में ही बस गए हो तुम। 29 /05 /2020 सुजाता सक्सेना
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